'भारत-पाकिस्‍तान दोस्‍ती कर लें तो होर्मुज का झंझट खत्म हो जाएगा', पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने बताया IPI और TAPI प्‍लान

Updated on 25-04-2026 01:18 PM
इस्लामाबाद: होर्मुज स्ट्रेट संकट ने दक्षिण एशियाई देशों पर गंभीर असर डाला है और भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत बाकी के देश बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में पाकिस्तान के एक्सपर्ट ने चीन-भारत संघर्ष के बावजूद कारोबार जारी रखने का हवाला देकर पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वो अपने पड़ोसी देश से व्यापार बहाल करे। अली तौकीर शेख, जो एक क्लाइमेट चेंज और डेवलपमेंट एक्सपर्ट हैं उन्होंने शहबाज सरकार को सलाह दी है कि होर्मुज संकट से साबित हो गया है कि भारत से दोस्ती करने में ही भलाई है। उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान पहले से ही भारत से व्यापार नहीं करने की कीमत चुका रहा है और होर्मुज संकट ने स्थिति को काफी खराब कर दिया है।

उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान के तेल आयात का 81 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत अपने 40 प्रतिशत तेल और 80 प्रतिशत गैस के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। ऐसे में दो पाइपलाइन प्रोजेक्ट हैं जिनपर अगर भारत और पाकिस्तान एक साथ आ जाए तो दोनों देश अपनी ऊर्जा समस्या का समधान कर सकते हैं। पहला- ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन और दूसरा- तापी (TAPI) परियोजना।

ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन का जिक्र

अली तौकीर शेख ने शहबाज शरीफ की सरकार को ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन पर बड़ी सलाह दी है। उन्होंने दलील दी है कि ईरान-पाकिस्तान पाइपलाइन का ईरान वाला हिस्सा पहले ही बन चुका है। पाकिस्तान को अपने 780 किलोमीटर लंबे हिस्से में से सिर्फ 80 किलोमीटर का काम पूरा करना है लेकिन अमेरिका की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रहा है और ईरान ने उसपर 18 अरब डॉलर का जुर्माना ठोक दिया है। अगर अमेरिका के प्रतिबंध हट जाते हैं तो इस पाइपलाइन को पूरा करने से पाकिस्तान के उद्योगों को ऊर्जा मिलेगी, बिजली की लागत कम होगी और ऐसी लगातार आर्थिक गतिविधियां पैदा होंगी जो किसी भी देश को अंदर से मजबूत बनाती हैं।
ईरान का 'साउथ पार्स' गैस क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र है और यह फारस की खाड़ी, कैस्पियन सागर और मध्य एशिया के मिलन बिंदु पर स्थित है। अगर ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन पूरी हो जाती है तो यह मध्य-पूर्व के सबसे बड़े गैस भंडारों को दक्षिण एशिया के सबसे बड़े ऊर्जा बाजारों से जोड़ देगी। साथ ही ईरान के उत्तर की ओर तुर्कमेनिस्तान तक पहले से मौजूद संपर्कों का मतलब यह भी है कि इस रास्ते से भविष्य में मध्य एशिया की गैस अफगानिस्तान से गुजरे बिना ही पूरब की ओर भेजी जा सकेगी। इससे पाकिस्तान को ट्रांजिट शुल्क के रूप में कमाई होगी। भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होगी और ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका मिलेगा।
TAPI परियोजना क्या है?
  • तापी (TAPI) परियोजना एक महत्वाकांक्षी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना है। इसका मकसद तुर्कमेनिस्तान के विशाल गैस भंडारों को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारत तक पहुंचाना है। इसमें तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत शामिल है।
  • यह पाइपलाइन करीब 1,814 किलोमीटर लंबी होगी। इससे प्रतिवर्ष लगभग 33 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) प्राकृतिक गैस का परिवहन होने की उम्मीद है।
  • गैस तुर्कमेनिस्तान के गल्किनिश गैस क्षेत्र से हासिल की जाएगी जो दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक है। भारत के लिए यह परियोजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था लेकिन अफगानिस्तान में अस्थिरता और पाकिस्तान से झगड़े ने इस प्रोजेक्ट को रोक दिया।

अली तौकीर शेख ने इन दोनों गैस पाइपलाइन का हवाला देते हुए कहा है कि ये दोनों पाइपलाइनें मिलकर इस क्षेत्र को पश्चिम और उत्तर दोनों दिशाओं से जमीनी ऊर्जा आपूर्ति प्रदान करती हैं और वे गलियारे बनाती हैं जिनके माध्यम से आखिरकार नवीकरणीय ऊर्जा का व्यापार होगा। इसके अलावा प्रतिद्वंद्वियों के सहयोग करने का एक ढांचागत कारण भी होगा। यह जलवायु निवेश होने के साथ-साथ एक रणनीतिक निवेश भी है। उन्होंने लिखा है कि होर्मुज संकट ने दिखाया है कि आर्थिक अलगाव की वास्तविक कीमत क्या होती है। इसका समाधान और ज्यादा अलगाव नहीं बल्कि दोनों देशों का एक साथ आना है जिससे दोनों देश अपनी ऊर्जा समस्या का स्थायी हल कर सकते हैं।

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